कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन (TV, AC, फ्रिज, वॉशिंग मशीन वगैरह पर मिलने वाला EMI/इंस्टॉलमेंट लोन) आजकल बहुत आम हो गया है। दुकान पर नो-कॉस्ट EMI के विज्ञापन, ऑनलाइन फाइनेंस ऑफर और वन-क्लिक खरीदी सब मिलती है। पर सवाल भी उठता है: क्या ये लोन असुरक्षित (unsafe) हैं? क्या धोखाधड़ी का डर है? क्या ब्याज छिपा हो सकता है? और एक ग्राहक के तौर पर आप कैसे सुरक्षित रहेंगे?
नीचे आसान भाषा में हर बात बताई गयी है। जोखिम क्या हैं, कौन-कौन से नियम आपको बचाते हैं, और अंत में कुछ बढ़िया टिप्स जिनको अपनाकर आप बुद्धिमानी से खरीदारी कर सकें।
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| क्या कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन असुरक्षित हैं? |
कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन क्या होता है? (बहुत सरल)
कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन वह छोटा-समय का लोन है जो घरेलू सामान खरीदने के लिए दिया जाता है, जैसे TV, फ्रिज, AC, मोबाइल या उपकरण। यह बैंक, NBFC या फ्रॉम-रिटेलर/फिनटेक पार्टनर के जरिए मिलता है। कई बार नो-कॉस्ट EMI या 0% interest ऑफर दिखते हैं, जो असल में अलग तरीके से प्रबंधित होते हैं। बेसिक जानकारी और प्रोडक्ट का स्वरूप बैंक/लेंडर के पेज पर मिलता है।
सबसे बड़ा जोखिम कहाँ है? (छोटे और सीधे बिंदु)
- ऊँचा वार्षिक प्रतिशत दर (APR): कुछ ऑफ़र में रेट 12%–22% तक होते हैं। खासकर छोटे-राशि वाले लनों पर या फाइनटेक/BNPL ऑफर्स पर। इसलिए छोटी किस्त देखा कर आप लंबी अवधि में ज़्यादा देते रह सकते हैं।
- छिपे हुए चार्ज/प्रोसेसिंग फीस: कुछ लेंडर प्रोसेसिंग फीस या GST अलग से काटते हैं। यह खरीद के समय स्पष्ट न भी दिखे।
- धोखाधड़ी वाले ऑफर / फेक लोन-मेसेंजर: कुछ लोग व्हाट्सऐप/कॉल पर इंस्टेंट अप्रूवल का लालच देकर पैसे ऐंठ लेते हैं - स्कैम केस अक्सर रिपोर्ट होते हैं। इसलिए सिर्फ आधिकारिक चैनल पर भरोसा रखें।
- अत्यधिक आक्रामक recovery / repossession: अगर भुगतान रुका तो कुछ मामलों में गलत recovery तरीके अपनाये जा सकते हैं। पर RBI/नियम ऐसी हठधर्मिता पर रोक लगाते हैं, forcible repossession/धमकी अवैध है और शिकायत की जा सकती है।
सार: ड्यूरेबल लोन का जोखिम अमूमन तब बढ़ता है जब आप ऑफर की पूरी शर्तें नहीं पढ़ते या अनधिकृत चैनल से ले लेते हैं।
क्या RBI/कानून से सुरक्षा है? - हाँ, कुछ अहम नियम हैं
RBI ने डिजिटल-लेंडिंग और लेंडर-पेशेवरों के लिये निर्देश जारी किए हैं ताकि borrowers की सुरक्षा हो। इन दिशानिर्देशों में पारदर्शिता, शुल्क-घोषणा, ग्राहक-अनुमति (consent) और शिकायत-निवारण शामिल है। साथ ही ‘Fair Practices Code’ के जरिए NBFCs और बैंकों पर अनावश्यक दबाव/हैरसमेंट पर रोकें हैं। इसका मतलब - अगर कोई लेंडर गलत व्यवहार करे तो आपके पास अधिकार और शिकायत के रास्ते हैं।
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नो-कॉस्ट EMI / 0% interest - असल में क्या होता है?
काफी बार रिटेलर या ब्रांड नो-कॉस्ट EMI बोलता है पर असल में दो मॉडल होते हैं:
- बैंक/लेंडर वास्तविक ब्याज को रिटेलर या ब्रांड से recover कर लेते हैं, ग्राहक को नहीं।
- या तो ब्याज ग्राहक पर ही होता है पर रिटेलर प्रमोशन के दौरान उसे कम्पेन्सेट कर देता है (यह अक्सर कीमत में हिसाब करके किया जाता है)।
इसलिए खरीदने से पहले यह पूछें: EMI पर कुल भुगतान कितना बनेगा? और Processing
fee या GST अलग से लगेगा क्या? - ये सवाल आपको सच्चाई बताने में मदद करेंगे।
ठगे जाने के आम तरीक़े - और कैसे बचें
- फेक approval/processing fee स्कैम:WhatsApp/कॉल पर approval दिखाकर पहले पैसे मंगना। यह धोखाधड़ी है। बैंक कभी आवेदन जमा करवा कर पहले फीस नहीं मांगेगा। अगर कोई पहले पैसे मांगे तो साफ़ इंकार कर दें।
- छुपे शर्तों के साथ 0% ऑफर: EMI टेबल और total cost जाँचें।
- अनौपचारिक recovery agents: अगर recovery में धमकी/शोषण हो तो तुरंत बैंक की grievance and RBI complaint रूट फ़ॉलो करें। RBI और बैंकों के पास grievance redressal चैनल हैं।
सुरक्षित रहने के 8 व्यावहारिक कदम (यही अपनाइए)
- केवल आधिकारिक चैनल से ही आवेदन करें: बैंक शाखा, बैंक/बड़े रिटेलर की वेबसाइट या प्रतिष्ठित NBFCs।
- लिखित तौर पर APR/processing fees मांगें: EMI के साथ कुल भुगतान (total payable) पूछा करें।
- No upfront processing fee पर संदेह रखें: बैंक/लेंडर कभी भी बिना कागज़ात/सत्यापन पैसे की मांग नहीं करते।
- छिपी शर्तें पढ़ें: टर्म्स & conditions (prepayment, foreclosure charges) जाँचें।
- अपने क्रेडिट स्कोर पर नजर रखें: CIBIL जैसी रिपोर्ट से पता चलता है कि आप कितने सुदृढ़ ग्राहक हैं। बेहतर स्कोर पर बेहतर टर्म मिलते हैं।
- EMI-बजट पहले से तय करें: EMI आपकी मासिक आय के मुताबिक होनी चाहिए।
- अगर धमकी मिले तो रिकॉर्ड रखें और शिकायत करें: कॉल-रिकॉर्ड, SMS/WhatsApp संदेश रखें और बैंक/RBI/Police को रिपोर्ट करें।
- ऑफर को तुलना करिए: अलग-अलग लेंडर और रिटेलर के औसत APR चीज़ें तुलना करके सबसे अच्छा विकल्प चुनें।
किसे कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन लेना चाहिए - छोटा फैसला गाइड
- ले लें अगर: आपको तत्काल जरूरत है, आप EMI सहजता से दे सकते हैं, और ऑफर पारदर्शी है।
- सोचें दो बार अगर: लोन की कुल लागत अधिक दिखे, repayment आपकी income से भारी पड़े, या ऑफर किसी अनजान एजेंट ने भेजा हो।
याद रखें: छोटा सामान पर बहुत छोटा EMi और अच्छी खरीद-value ठीक है। पर बड़े-राशि के लोन पर सोच-समझकर तुलना जरुरी है।
FAQs (सरल और सीधे)
Q: कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन लेना सुरक्षित है या नहीं?
हाँ, यदि आप आधिकारिक बैंक/बड़े रिटेलर या भरोसेमंद NBFC से लें और टर्म्स साफ हों तो सामान्यतः सुरक्षित है। असुरक्षा तब बढ़ती है जब ऑफर अनजान चैनल से,
बिना लिखित शर्तों या upfront फीस के आता है।
Q: EMI से पहले किन चीज़ों को जरूर चेक करें?
ब्याज दर (APR), processing fees, GST का असर,
total payable (कुल भुगतान), prepayment/foreclosure charges और EMI शुरू होने की तारीख - सब लिखित में पूछकर पढ़ लें।
Q: अगर लोन लेने के बाद recovery या धमकी हो तो क्या करें?
तुरंत बैंक/लेंडर के grievance cell को लिखित शिकायत भेजें,
कॉल/SMS/WhatsApp का रिकॉर्ड रखें और अगर समाधान नहीं मिले तो RBI की grievance
portal या लोकल साइबर/पुलिस में शिकायत दर्ज कराएँ।
Q: सुरक्षित तरीके से सबसे अच्छा डील कैसे चुनें?
आधिकारिक बैंक/बड़े रिटेलर या प्रतिष्ठित NBFC के offers
तुलना करें, अपने मासिक बजट के हिसाब से EMI तय करें, किसी अनजान एजेंट से तुरंत सहमति न दें और हमेशा sanction-letter
पढ़ कर ही साइन करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन स्वयं में जरूरी नहीं कि असुरक्षित हों। पर जोखिम तब आता है जब आप शर्तें न पढ़ें, अनौपचारिक/अनधिकृत चैनल पर विश्वास करें या अपनी repaying capacity से अधिक उधार लें। RBI और बैंक-नियम ग्राहक की सुरक्षा के लिए मौजूद हैं। पर आप ही अपनी पहली और सबसे बढ़िया सुरक्षा हैं: शांति से पढ़ें, तुलना करें, और सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से ही आगे बढ़ें।
Resources (पढ़ने के लिए - आधिकारिक और भरोसेमंद)
- RBI: Guidelines on Digital Lending & Fair Practices. (Reserve Bank of India)
- HDFC / BajajFinserv / TVS Credit: Consumer durable loan product pages (example terms). (HDFC Bank)
- Paisabazaar / CIBIL: interest rate ranges and consumer guidance. (Paisabazaar)
- News reports on loan scams and recovery misuse (Livemint / Times of India / Business Standard). (mint)
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। ब्याज दरें, टर्म और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। लोन लेने से पहले संबंधित बैंक/लेंडर की आधिकारिक शर्तें और लिखित दस्तावेज़ जाँच लें और आवश्यक हो तो वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
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